Saturday, October 24, 2009

आ गई ठण्ड


डाल दिया है मैंने उनका स्वेटर।

बुन रही हूँ, धीरे-धीरे।

हो जाएगा पूरा, उनकी यादों के सहारे।

जब वे लौटेंगे, तब देख के हैरान होंगे।

कैसे बना लिया तुमने मेरे बिना?

वो क्या जाने उनके हर अंग का नाप,

बसा है इन आँखों में।

जो बुन रहा है ख्वाब अनगिनत।

दिख रहा है, बस स्वेटर बुनता।

कल तक गला भी पूरा बन जाएगा।

उस बार की तरह नही होगा छोटा।

तब मन विचलित था, जब उसे बुना था।

नींद भी नही थी चैन भी नही था।

अन्दर के महाकुम्भ की गर्मी,

बाहर की ठण्ड से भयावह थी।

अब आ रहा है , चैन का संदेसा।

आज पूरा हो जाएगा इन्तज़ार का सफर।

आएगी जब ठंडी बयार,

ढक लूंगी में मन से तन,

आ जायेगी गर्मी फ़िर से, दूर करेगी ये ठिठुरन।




Monday, September 28, 2009

एक और रावन जल गया

एक और रावन जल गया।
अंदर का नही, बाहर का।
वर्षों से इसी तरह, जलाया जा रहा है।
जल रहा है अविरल,
उसका अन्तःकरण, देखकर,
बलात्कार, भ्रूण हत्या,
बढ़ते भ्रष्टाचार,
मौन है फ़िर भी,
सुलग रहा है ,भीतर ही भीतर।
बाहर का दैत्य जलाया जा रहा है,
एक अदृश्य दैत्य द्वारा,
नही दिख रहा किसी को ,
नंगी आंखों से भी।
समाज का वह रावन,
जो छीन रहा है,
बालमन ki कोमलता,
बचपन के खिलौने।
थमा रहा है, एक लुप्त हथियार।
कैसे बचे? bikhrta बचपन?
कैसे मरे अंदर का रावन?


Monday, August 31, 2009

४४ बसंत


छवि जोड़ेंबीत गए एक-एक कर,
जीवन के ४४ बसंत
हर दिन, हर पल कुछ नया संजोया,
मिला नहीं पर कोई अंत
ढूंढ रहे थे नयन मगन हो,
एक अनवरत सत्य जो,
लघु, दीर्घ और अतिदीर्घ है,
यह यात्रा अविरल अनंत
मूल्यों का संग्रह रहा,
हर पग पर आता-जाता
कभी निभाया,कभी निपटाया,
सहज, सरल मन को भाता
फ़िर आया एक नया शगूफा,
छेड़ गया मन का दर्पण
रोया, छटपटाया कितना,
सुना गया स्वर क्रंदन
एक समय ऐसा भी आया,
भटक गया जब मन ऐसा
नहीं रुका गतिरोध ह्रदय का,
सब प्रतिरोध व्यर्थ गया.


Sunday, August 23, 2009

उनका प्रेमविवाह

उन्होंने कर लिया है,
अपनी मर्जी से प्रेमविवाह।
मुझे बताना जरुरी नही समझा,
सुना है दोनों साथ सो रहे हैं।
आते-जाते साथ है,
साथ घूम रहे है।
काश की हम, हमसफ़र हो जाते,
जहाँ वो जाते, हम भी पहुँच जाते।
उन्होंने हमें मौका नही दिया,
वरना हम भी पीछे पड़ जाते।
फोन पर भी उनके रहता है पहरा,
हंसने पर लगा है, प्रतिबन्ध गहरा।
मेरी तो शामत है, उनका प्रेमविवाह,
चाहे कुछ समय के लिए हो,
पर गहरा है विवाद।
अब तो ऊपर वाला ही मालिक है,
न जाने कब तलाक की तारिख है.

Monday, August 17, 2009

जयपुर


सचमुच यह पिंक सिटी है.यहाँ की भीनीं बारिश और साफ-स्वच्छ सड़कों ने मुझे घूमने पर मजबूरकर दिया। मैंने यूनिवर्सिटी से लालकोठी, अजमेरी गेट,चिडियाघर,नेहरू बाज़ार,बिरला मन्दिर तथा गणेश मन्दिर देखा। बाकि कल बताउंगी.

दूसरा सप्ताह


आज हमारे रेफ्रेशेर कोर्से का दूसरा सप्ताह शुरू हुआ। ओमप्रकाश शर्माजी ने पहले शेशन में ग्रामीण क्षेत्रों में रेडियो और मीडिया की उपयोगिता पर चर्चा की। फ़िर आए अलोक पुराणिक ब्लॉग की नई और महत्वपूर्ण संभावनाओं के साथ। उन्होंने हमें ब्लॉग बनने से लेकर कमेन्ट लिखने तक की पूरी कार्यप्रणाली समझाई। अब हमारे नॉन मीडिया साथी भी ब्लॉग बना सकेंगे। स्वाधीनता दिवस की बधाई के साथ.

Wednesday, July 22, 2009

मेरा सृजन


कहाँ है मेरा सृजन?
क्या उसे भी रौंध डाला,
उस मशीनी दैत्य ने?
फूलने से पूर्व ही,
फूल से पूछा नहीं,
क्या तुझे भी देखना है दुनिया?
उससे भी पहले जांचकर,
जान ली उसकी दशा।
बाल है या बालिका?
अंश है मेरा सृजन,
उसे भी आने दो यहाँ,
वंश है मेरा सृजन.

Saturday, July 18, 2009

कोहरे की ओट में



कोहरे की ओट में दिखा, एक आशियाना।
कुछ पास आता, कुछ दूर जाता।
नन्हे क़दमों से आगे को बढ़ता,
फ़िर तेज़ क़दमों से पीछे को जाता।
कभी कुछ कहता, कभी गुनगुनाता,
हौले से आकर, सर्र से उड़ जाता।
उसी के पीछे हो लिया है मन,
न जाने अब कहाँ है जाता।
एक बार सोचा रूककर पूछूं,
बिछड़ने के डर से, मन डर जाता।
कहीं लौट जाए न, पास आती खु शियां।
दूर हो न जाए, मेरा आशियाना।




सूर्यग्रहण

इस बार हरियाली अमावस्या कुछ खास रहेगी। क्योंकि सूर्योदय होते ही सूर्य अस्ताचल में प्रवेश कर जायगा। लगभग दो घंटे के बाद सूर्य दिखाई देगा। वैसे बादलों का भी असर हो सकता है। कहा जा रहा है की यह योग १९४४ के बाद आया है। इस दिन का लोगों को वर्षों से इंतजार था। ऐसी मान्यता है की सूर्यग्रहण के दौरान किसी मंत्र को सिद्ध किया जाय तो वह अधिक असर कारक होता है। सभी को सूर्यग्रहण के समय अपने इष्ट की आराधना करना चाहिए जिससे सभी संभावित कष्टों को टाला जा सके। नियमित दिनचर्या में थोड़ा सा परिवर्तन कर ले। कोशिश करें की सूर्यग्रहण के समय ध्यान करें। यह ध्यान आपको डर के कारण नही करना है, बल्कि सहत भाव से करना है।
लगभग ६५ वर्ष बाद हो रहे इस सूर्य ग्रहण को हमारे मध्य प्रदेश के आलावा उत्तर प्रदेश, बिहार तथा कई निचले हिस्सों में देखा जा सकेगा। अनेक मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ आयोजित किए जा रहे हैं। एक हिंदू मान्यता के अनुसार ग्रह के दौरान भोजन नही किया जाता। ग्रहण पूर्ण होने पर स्नान-दान करने के बाद ही भोजन करते है। यह बात पढ़े-लिखे लोगों को उचित नही लगती परन्तु विज्ञानं की दृष्टि से भी यह मन जाता है की ग्रहण के समय खाने-पीने से बचना चाहिए.
बुजुर्गों और बच्चों के लिए छूट होती है। यदि सहन न हो तो उन्हें तुलसी की पत्ती डालकर खिलाया जा सकता है। आप भी अपने घर में दूध, पीने के पानी, पके हुए भोजन आदि में तुलसी की पत्ती डालकर रखें।

Sunday, July 12, 2009

सावन के झूले


सावन के झूलों का मौसम,

कब आता है,

कब जाता है?

अब ये केवल वही बताए,

जिसने वो झूला, झूला है।

हमने तो देखा है झूला,

हरदम चलता, बिजली से,

जब वो नही होती है,

तभी नही होता झूला,

पता नही सावन या भादों,

कभी सुना था,माँ- dअदि से,

सावन का वो झूला।

नीम-आम के ऊपर झूला,

रिमझिम - रिमझिम मेघ बरसते,

झूले पर सब गीत भी गाते,

लीना-नीना, कुसुम-माधुरी,

घंटों झूलों पर बतियाते।

अब तो आम-नीम नही अपने,

कहाँ बंधेगा झूला,

pजीवन की रक्षा करने को,

पढ़ लगाना होगा.




Friday, July 10, 2009


हाँ, मुझे भी याद है
तुम्हारा वह घर।
घर ही तो था,
ईंट को गारे से जोड़कर।
बनाया गया,
जिसमे मैंने पहली बार,
यह सोचकर कदम रखा,
की मिलेंगे कुछ जाने-पहचाने,
पर तुम्हे घेरे खड़े थे,
कुछ अनजाने,
जो तुम्हारे अपने थे, शायद!
मुझे घेरकर,
सोच रहे थे,
न जाने कौन है।
जब तुमने ,
लाकर दिया था,
वह नीला ,दुशाला,
देखा था मैंने,
तुम्हे कृतघ्न होकर।
तब शायद उनको,
विश्वास हुआ था,
मै भी हूँ तुम्हारी,
एक परछाईं!
छोड़कर सारी औपचारिकता,
तुमने मुझे वह दिया,
जो मैंने चाहा।
तब निर्णय किया,
अब मै ईंट -गारे के ,
इस घर को घर बनाउंगी।
जो मैंने पाया,
उसे बांटकर,
अपनी इस नन्ही दुनिया को ,
खूबसूरत बनाउंगी।







Tuesday, July 7, 2009

श्रावण मै स्वास्थ्य

सावन के महीने में हरियाली के साथ ही मौसम भी खुशनुमा हो जाता है। खट्टा-मीठा-चटपटा खाने को मन ललचाने लगता है। बारिश की फुहारों के साथ भजिये खाने का मज़ा ही निराला होता है। परन्तु खाने के स्वाद के साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। हो सके तो बरसात में पानी उबालकर पियें। जितनी भूख हो उससे एक रोटी कम ही खाएं। अधिक खाने और ज्यादा भूखे रहने से अनेक बीमारियाँ होती हैं पर कम खाने से कुछ बिमारिओं से बचा जा सकता है। उत्तम स्वास्थ्य ही हमारी पूँजी है।

श्रावण आया


श्रावण आया झूमकर, बारिश में भीगे हम सब।


धरती ने ओढी हरियाली, फैली है ये छटा निराली।


बिजली की चम-चम, बूंदों कि छम-छम।


बादल के गर्जन से , डरता है मेरा मन।


कब नदी भरेगी, सागर तक जायेगी?


मेरे मन का जल, भरकर ले आएगी।


सागर से मिलना ही, नदी का लक्ष्य है।


सबको जल देना, नदी का लक्ष्य है।



Friday, May 22, 2009

क्या तुम डरते हो

क्या तुम डरते हो, काले घनघोर अंधेरे से, इस जग के फेरे से।
क्या तुम डरते हो, गरजते बादलों से, कड़कती बिजली से।
क्या तुम डरते हो, उफनती नदी से, बहती हवा से।
क्या तुम डरते हो , गिरते झरने से, घिरते तूफान से।
क्या तुम डरते हो, ऊंचे पहाड़ से, चलते हिंडोले से।
क्या तुम डरते हो, लम्बी सड़क से, तेज़ रफ्तार से।
क्या तुम डरते हो,खतरनाक मोड़ से, दुर्घटना से।
क्या तुम डरते हो, सपनों से, हकीकत से।
डर-डर के जीना कैसा जीना है।
डर को मन से निकाल कर जीन ही जीना है।

Wednesday, May 13, 2009

इंतजार

इंतजार रहता है, हर किसी को किसी का।
भोजन का हो चाहे भजन का ।
आने का हो चाहे जाने का।
मिलने का हो चाहे बिछड़ने का।
सब इसी उदेड-बुन मै लगे है।
कब ख़त्म हो यह सिलसिला इंतजार का।
जन्म और मृत्यु का भी इंतजार होता है।
शादी और बर्बादी का भी होता है इंतजार।
परीक्षा की डेट का करते हैं इंतजार।
फ़िर करने लगते हैं इंतजार रिजल्ट का।
कब ख़त्म हो यह सिलसिला इंतजार का।
छुट्टी का इंतजार बेसब्री से होता।
फ़िर होता कालेज खुलने का इंतजार।
पार्टी का इंतजार हर समय है रहता।
उसके बाद आता उत्सव का इंतजार।
कब ख़त्म हो यह सिलसिला इंतजार का।
बस आने का इंतजार, टिकट मिलने का इंतजार।
बस मै बैठे तो स्टाप आने का इंतजार।
क्लास मै टीचर के आने का इंतजार।
टीचर का बोरिंग लेक्चर ख़त्म होने का इंतजार।
कब ख़त्म हो यह सिलसिला इंतजार का।
लिस्ट बहुत लम्बी है, इंतजारों की ।
कभी न ख़त्म होगा सिलसिला इंतजार का.

भीगा मन


आज पहली बार भीगा मन,
इससे पहले बस तन भीगा था।
चन्द फुहारों के छींटों से,
बादल की गिरती बूंदों से।
सर्द हवाएं बेकल करतीं,
गिरती बूंदों को बिखरातीं।
न जाने क्यूँ तन पर पड़ती,
मन को कभी नहीं छू पाई।
आज मगर वो बारिश आई,
एक अनोखा संदेश लाई
तन भीगा, मन भीग गया है,
कोई इसको जान न पाया।
मैंने क्या खोया क्या पाया?

Thursday, March 12, 2009

फागुन आया

प्रकृति का यौवन उमड़ा है,
खिल रही हर कोमल कली।

धरा, धरा ने वेश निराला,
इठलाती है हर डाली।

बाट रहा ऋतुराज बहार
लगा रही कोयल गुहार।

देखो आम भी बौर गया,
खिल गए टेसू, कचनार।

फूलों के ये रंग-बिरंगे,
गुच्छ बना रहे मदहोश।

होली का त्यौहार आ रहा,
भरता एक अनोखा जोश।

कुछ दोहे, कुछ छंद उडे,
प्रेम भरे मन मै बहुरंग।

लाल गुलाबी चेहरे हो गये,
दादी खड़ी रह गई दंग।

माती की भीनी खुशबु ने,
याद दिलाया भाईचारा।

इंतजार किस बार का यारो,
आया पर्व है प्यारा।

आओ तुम भी रंग लगालो,
फ़िरमत कहना मिले नहीं ।

फागुन सबको गले लगता ,
उंचनीच का भेद नहीं.

होली की शुभकामनाओं के साथ.

Tuesday, March 10, 2009

होली मुबारक

होली का त्यौहार रंगीला, आया लेकर रंग।
चुन्नू भीगा, मुन्नू भीगा मै भी भीगी संग।
गट्टू छुपा बैठा था नीचे, सब फ़िर भागे उसके पीछे
आज नही वो बच पायेगा, सब रंगों मै रंग जाएगा।
मम्मी गुझिया बाँट रही है, दीदी टीका लगा रही है।
गोलू ने पीछे से आकर, गट्टू को भी पोत दिया है।
आओ तुम टीका लगवालो, एक और गुझिया भी खा लो।
फ़िर मुझसे मत करना शिकायत, हम न कोई बात सुनेंगे।
जीते रहे अगर हम, अगली बार होली मै मिलेंगे।
होली मुबारक

Saturday, February 28, 2009

आ रही है होली

चुपके-चुपके, सबसे छुपके,
दबे पाँव आ रही है होली।

सबको मनके रंग दिखाने,
और सुनाने मन की बोली।

चाहो तो तुम भी रंग डालो,
और नही तो ख़ुद को रंग लो।

मुन्नी पप्पू गोलू चुन्नी
आज नही कोई भी बचेगा।

अपने साथी पशु और पक्षी
सब को अपने रंग, रंग लेगा।

इसकी चूनर उसकी टोपी,
सब हो जाए नीली पीली।

रंग भरी पिचकारी लेकर
दौडी लीना नीना रोली।

कोई डरकर छुप बैठा है,
अम्मा की खटिया के नीचे।

कोई सबको डरा रहा है,
बापू की कुटिया के पीछे।

होली का त्यौहार रंगीला,
मन मे रंग भरे है निराला।

तुम भी अपने रंग मे भीगो,
चाहे नीला, चाहे पीला।

होली मुबारक

Tuesday, January 27, 2009

वसंत

चारो ओर छा रही है, पीली पीली छटा।
मुखर हो रहा मन मेरा।

आया वसंत, ले आया फ़िर
प्रीत मिलन की खुशियाँ।

गीत गा रही मधुर मिलन के,
मन की खिलती बगिया।

सदा की तरह इस बार भी वसंत बहार छाने लगी है। गर्मी की हलकी शुरुआत और ठण्ड की विदाई से सब रोमांचित हो रहे हैं। पर यह खुशी कुछ ही पलों की होती है। गर्मी की चिलचिलाहट से हम सभी बहुत घबराते हैं।

प्यार

जो लोग प्यार करते हैं, यह चमत्कार उनके साथ निरंतर होता है, वे जितना देते हैं, उससे ज्यादा उनके पास होता है। रेन मारिया मिलकर

सुविचार

प्यार में पडे मूर्ख का मतलब मै नहीं समझ पता, मै तो सोचता हूँ, अगर आप प्यार नहीं करते तो आप मूर्ख हैं। सिगमंड फ्रायड

Monday, January 12, 2009

आइये गाज़र का हलवा बनायें

सबसे पहले गाज़र को धोकर छील लें। कद्दूकस कर लें। अब उसे एक ग्लास दूध और एक कटोरी मलाई के साथ धीमी आंच पर चढा दें आधे घंटे बाद उसकी आंच तेज़ कर दें। उसमे शक्कर, ड्राई फ्रूट्स, मावा मिलाये।१५-२० मिनट तक चलते रहें। यदि चिपकने लगे तो थोड़ा सा घी डाल लें। अब नारियल का चूरा और इलायची डालकर परोसें।

माटी

माटी की ममता माथे लगाकर,
धरती की समता का ओढ़ दुशाला।

पीढा को हरने का, खुशियों को बाँटने का,
हिल्मिलाता स्वप्न मैंने पाला।

स्वागत है, उनका जो इसे स्वीकार,
उनका भी स्वागत है जो इससे हारे।

हाथों में हाथ लिए साथ देना होगा,
इंसा को इंसानियत से मिलाना ही होगा।

आप भी हो जायें इसमे शामिल,
दूसरों को बनाये काम के

हमने जो सोचा है, सच व्ही होगा।
भारत हमारा सबसे आगे होगा।

आओ मिलकर देश को आगे ले चलें।
धर्म, जाती, रंग भेद से ऊपर उठें।

लायें नया विचार निराला,
जो बनाये देश को हरियाला-उजला ।

युवा दिवस

कल शायद आपने भी युवा दिवस मनाया हो। जरा ये भी सोचिये की आपकी युवा होती बेटी की क्या समस्याएं हैं। उसके अध्ययन स्थल की, आने-जाने की, कपड़े चुनने की, विषय चुनने की या व्यवसाय चुनने की। बचपन की समस्याओं से तो माँ-बाप आराम से निपट लेते हैं, परन्तु युवा बेटियों की समस्याएं काफी जटिल होती हैं। उनकी समस्याओं को ध्यान से सुने और ठंडे दिमाग से उनका हल ढूंढे। यदि अधिक परेशानी हो तो सबंधित टीचर से सलाह लें। समय के साथ सामंजस्य बनाकर चलेंगे तो आपकी बेटी की मुश्किलें आसन हो जाएँगी। अपनी बेटी पर विश्वास करें और दुनिया में जीने के अच्छे गुर सिखाएं।

विचार

समय बीज के माध्यम से सीखता है, फसल के माध्यम से सिखाता है और बसंत के माध्यम से आनंद करता है। विलियम ब्लेक

Thursday, January 8, 2009

मज़ा आ गया


कल क्या मज़ेदार ठण्ड पड़ी। सारा दिन चाय के दौर चले। छुट्टी और ठण्ड के सभी ने मज़े लिए। मुझे लगता है इस वर्ष का सबसे ठंडा दिन रहा ८ जनवरी। क्या आपको भी कुछ ऐसा ही लगा। आपने चाय के साथ पकौडे भी जरुर खाए होंगे। मै जरा फिगर का ख्याल रखने लगी हूँ। इसलिए मैंने बस दो ही पकौडों से काम चलाया। हमने दल-बाटी का मज़ा भी लिया। रात में आग जलाकर बैठने का मज़ा ही और होता है। जगह और समय की कमी के कारण वह संभव नही। इसलिए हीटर से ही काम चलाया। मुबारक हो कड़कती ठण्ड और गरमागरम पकौडे।

Monday, January 5, 2009

आने वाली परीक्षा की तैयारी


परीक्षा का नाम सुनते ही हम घबरा से जाते हैं। सच है, परीक्षा शब्द ही कुछ अजीब है। किसी कक्षा की परीक्षा हो या विशेष विषय से सम्बंधित प्रवेश परीक्षा, डर तो लगता है। लेकिन यदि पूर्व से व्यवस्थित तौर-तरीके से पढाई की जाए तो हर परीक्षा को आसान बनाया जा सकता है। सबसे पहली बात है-समय का बंटवारा! समय को इस हिसाब से बँटे की आपके घर, स्कूल या कोलेज, कोचिंग सभी जगह आने-जाने के आलावा आप कितना समय अध्ययन में लगाते हैं। मतलब की आपने जो पढ़ाई एक दिन में की है, उससे आपको कितना ज्ञान मिला। केवल यहाँ से वहां भागते रहना ही पढ़ाई नहीं है। अपने सिलेबस को पढ़े, किताबें एकत्रित करें,फ़िर पढ़ाई आरम्भ करें। घबराने से बँटे कम भी बिगड़ जाते हैं। स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई में तो सिलेबस के आलावा समय सीमा का भी ध्यान रखें। पूरी तैयारी से परीक्षा में जाए। सफलता अवश्य मिलेगी।

Saturday, January 3, 2009

लुई ब्रेल

४ जनवरी १८०९ को फ्रांस में जन्मे लुई ब्रेल अंधों के लिए ज्ञान के चक्षु बन गए। ब्रेल लिपि के निर्माण से नेत्रहीनों की पढने की कठिनाई को मिटने वाले लुई स्वयम भी नेत्रहीन थे। अपने पिता के चमडे के उद्योग में उत्सुकता रखने वाले लुई ने अपनी आखें एक दुर्घटना में गवां दी। यह दुर्घटना लुई के पिता की कार्यशाला में घटी। जहाँ तीन वर्ष की उम्र में एक लोहे का सूजा लुई की आँख में घुस गया। http://elba.szs.uni-karlsruhe.de/global/images/Louis_Braille.jpg

Friday, January 2, 2009

नियंत्रित बुद्धि - आज की चुनौती

मानव जीवन की सबसे बड़ी समस्या है - अनियंत्रित और अनियमित मन और बुद्धि। यदि मनुष्य अपनी बुद्धि पर अंकुश नही लगायगा तो उसमे और जानवर में कोई फर्क नही रह जाएगा। वह जंगल के जानवरों के समान आचरण करने लगेगा । समाज को उछ्रंख्लता से बचने के लिए मानव की बौद्धिक उर्जा को कार्यों में बाँटना जरुरी है। प्रश्न पूछते समय विषय से भटका नही। ऐसा अक्सर होता है कुछ जानना होता है और हम पूछने कुछ और लगते हैं। इसलिए अपनी बुद्धि पर नियंत्रण रखकर कम करें।

Thursday, January 1, 2009

पहेली


ये जिन्दगी एक पहेली है, सोचा न था। कभी प्यार से बेहाल, कभी क्रोध से लाल। ये जिन्दगी एक पहेली है, देखा न था। कभी प्यार का सागर, कभी सूखी नदी। ये जिन्दगी एक पहेली हो, सोचा न था। कभी मुस्कुरा के स्वीकारा, कभी झिड़की से ठुकराया। ये जिन्दगी एक पहेली रहेगी, कभी ऐसा न हो। खुले दिल की दाद नही, बुझे दिल की बात नही। ये जिन्दगी एक पहेली ही तो है, शायद तुम्हे लगे न लगे।

नए साल की शुभकामनाएँ

नई राह में, नई चाह मे नया सवेरा आए। नई उमंगें , नई तरंगे नई उडान लाए। पूरी हो मंगल कामना, खुशियाँ दामन चूमे । ऐसा हो नव वर्ष आपका, सदा खुशी से झूमें। साल २००९ आपको और आपके परिवार को वह सब दे जिसका आपको इंतजार है।