Monday, August 31, 2009

४४ बसंत


छवि जोड़ेंबीत गए एक-एक कर,
जीवन के ४४ बसंत
हर दिन, हर पल कुछ नया संजोया,
मिला नहीं पर कोई अंत
ढूंढ रहे थे नयन मगन हो,
एक अनवरत सत्य जो,
लघु, दीर्घ और अतिदीर्घ है,
यह यात्रा अविरल अनंत
मूल्यों का संग्रह रहा,
हर पग पर आता-जाता
कभी निभाया,कभी निपटाया,
सहज, सरल मन को भाता
फ़िर आया एक नया शगूफा,
छेड़ गया मन का दर्पण
रोया, छटपटाया कितना,
सुना गया स्वर क्रंदन
एक समय ऐसा भी आया,
भटक गया जब मन ऐसा
नहीं रुका गतिरोध ह्रदय का,
सब प्रतिरोध व्यर्थ गया.


Sunday, August 23, 2009

उनका प्रेमविवाह

उन्होंने कर लिया है,
अपनी मर्जी से प्रेमविवाह।
मुझे बताना जरुरी नही समझा,
सुना है दोनों साथ सो रहे हैं।
आते-जाते साथ है,
साथ घूम रहे है।
काश की हम, हमसफ़र हो जाते,
जहाँ वो जाते, हम भी पहुँच जाते।
उन्होंने हमें मौका नही दिया,
वरना हम भी पीछे पड़ जाते।
फोन पर भी उनके रहता है पहरा,
हंसने पर लगा है, प्रतिबन्ध गहरा।
मेरी तो शामत है, उनका प्रेमविवाह,
चाहे कुछ समय के लिए हो,
पर गहरा है विवाद।
अब तो ऊपर वाला ही मालिक है,
न जाने कब तलाक की तारिख है.

Monday, August 17, 2009

जयपुर


सचमुच यह पिंक सिटी है.यहाँ की भीनीं बारिश और साफ-स्वच्छ सड़कों ने मुझे घूमने पर मजबूरकर दिया। मैंने यूनिवर्सिटी से लालकोठी, अजमेरी गेट,चिडियाघर,नेहरू बाज़ार,बिरला मन्दिर तथा गणेश मन्दिर देखा। बाकि कल बताउंगी.

दूसरा सप्ताह


आज हमारे रेफ्रेशेर कोर्से का दूसरा सप्ताह शुरू हुआ। ओमप्रकाश शर्माजी ने पहले शेशन में ग्रामीण क्षेत्रों में रेडियो और मीडिया की उपयोगिता पर चर्चा की। फ़िर आए अलोक पुराणिक ब्लॉग की नई और महत्वपूर्ण संभावनाओं के साथ। उन्होंने हमें ब्लॉग बनने से लेकर कमेन्ट लिखने तक की पूरी कार्यप्रणाली समझाई। अब हमारे नॉन मीडिया साथी भी ब्लॉग बना सकेंगे। स्वाधीनता दिवस की बधाई के साथ.