Friday, July 1, 2011

Happy Doctors Day

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सफ़र

किसी और के दिल को धड़कते देखा होता,
जीवन का मुश्किल सफ़र आसाँ हो गया होता!

Sunday, July 4, 2010

हिमाकत




एक बार फिर बरसात का स्वागत है
मौसम की हिमाकत देखो, घेर लिया है मिलकर,
बरखा ,बदरा, बिजुरी,
चम्-चम् चमके बिजुरी ,
छम-छम बरसे बदरा.
बूंदों की थाप पर, हवा गा रही है
उनको सन लेके बहार आ रही है































































































































































Sunday, April 4, 2010

विचार-गोष्टी


डा वेद प्रताप वैदिक जी की पुस्तक भाजपा , हिंदुत्व और मुसलमान विषय पर केन्द्रित विचार-गोष्टी का सञ्चालन करते हुए मुझे जो हर्ष हुआ उसकी मै व्याख्या नहीं कर सकती। विचार - गोष्टी में मंच पर बाएं से कैलाश सारंग जी, कार्यक्रम के अध्यक्ष मदन मोहन जोशी जी, मो आरिफ बेग, डॉ वेद प्रताप वैदिक एवं संस्था के संचालक सनत जैन।

Thursday, January 28, 2010

शांति

सुना है शांति नाम है उसका,

किसी से कोई गिला नहीं, न किसी से कोई शिकवा।

न मिलने का सुख, न बिछड़ने का दुःख।

फिर भी सोचा मिल लूं।

देखना चाहा दिखी नहीं,

लोगों से पूछा पर पता न पाया।

क्या तुमने उसे देखा है?

दिखे तो दिखाना, मिले तो मिलाना।

मेरा पता ले लो,

बताना बुलाया है।

हो सका तो निमंत्रण भेज दूंगी,

मेसेज करुँगी या ईमेल कर दूंगी।

मेरे घर का सीधा-सादा पता है।

न दाये मुड़ना न बांये जाना,

वहां से निकलकर इधर आ जाना।

मै कब से उसी शांति को खोजती हूँ,

उसकी हर पल बाट जोहती हूँ.

Wednesday, January 20, 2010

आया वसंत




आज विद्या देवी सरस्वती की पूजा है मंदिरों और शालाओं मै पिछले कई दिनों से वसंतोत्सव मानाने की तैयारियां चल रही थी प्रकृति की सुन्दरता का यह पर्व हर वर्ष धूमधाम से मनाया जाता है पिली सरसों से खेत और पीले गेंदे के फूलों से बाग मनमोहक लगते हैं आधुनिकता की भागदौड़ मै भी अनायास ही इन पर ध्यान चला जाता है अब झूले और मेलो का कई निश्चित समय तो नहीं रहा, फिर भी मंदिर प्रांगन मै झूले डाले जाते है ठण्ड के कम होने का एहसास तो कल रत से ही होने लगा है आज केसरिया चावल विशेष रूप से बनाये j ते है

Monday, January 18, 2010

हमारा जन-गन-मन








जन गण मन अधिनायक जय हे



भारत भाग्य विधाता



पंजाब सिंध गुजरात मराठा



द्रविढ़ उत्कल बंग



विंध्य हिमांचल जमुना गंगा



उच्छल जलधि तरंग



तब शुभ नामे जागे



तब शुभ आशिष मांगे



गाये तब जय गाथा
जन गण मंगल दायक जय हे

भारत भाग्य विधाता

जय हे जय हे जय हे

जय जयजय हे

आप सोच रहे होंगे की मै आपको जन गन मन क्यों सुना रही हूँ?

नही मै आपको यह बता रही हूँ की हमारा राष्ट्रगान विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान चुना गया है।