
सावन के झूलों का मौसम,
कब आता है,
कब जाता है?
अब ये केवल वही बताए,
जिसने वो झूला, झूला है।
हमने तो देखा है झूला,
हरदम चलता, बिजली से,
जब वो नही होती है,
तभी नही होता झूला,
पता नही सावन या भादों,
कभी सुना था,माँ- dअदि से,
सावन का वो झूला।
नीम-आम के ऊपर झूला,
रिमझिम - रिमझिम मेघ बरसते,
झूले पर सब गीत भी गाते,
लीना-नीना, कुसुम-माधुरी,
घंटों झूलों पर बतियाते।
अब तो आम-नीम नही अपने,
कहाँ बंधेगा झूला,
pजीवन की रक्षा करने को,
पढ़ लगाना होगा.
कब आता है,
कब जाता है?
अब ये केवल वही बताए,
जिसने वो झूला, झूला है।
हमने तो देखा है झूला,
हरदम चलता, बिजली से,
जब वो नही होती है,
तभी नही होता झूला,
पता नही सावन या भादों,
कभी सुना था,माँ- dअदि से,
सावन का वो झूला।
नीम-आम के ऊपर झूला,
रिमझिम - रिमझिम मेघ बरसते,
झूले पर सब गीत भी गाते,
लीना-नीना, कुसुम-माधुरी,
घंटों झूलों पर बतियाते।
अब तो आम-नीम नही अपने,
कहाँ बंधेगा झूला,
pजीवन की रक्षा करने को,
पढ़ लगाना होगा.