Tuesday, July 7, 2009

श्रावण मै स्वास्थ्य

सावन के महीने में हरियाली के साथ ही मौसम भी खुशनुमा हो जाता है। खट्टा-मीठा-चटपटा खाने को मन ललचाने लगता है। बारिश की फुहारों के साथ भजिये खाने का मज़ा ही निराला होता है। परन्तु खाने के स्वाद के साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। हो सके तो बरसात में पानी उबालकर पियें। जितनी भूख हो उससे एक रोटी कम ही खाएं। अधिक खाने और ज्यादा भूखे रहने से अनेक बीमारियाँ होती हैं पर कम खाने से कुछ बिमारिओं से बचा जा सकता है। उत्तम स्वास्थ्य ही हमारी पूँजी है।

श्रावण आया


श्रावण आया झूमकर, बारिश में भीगे हम सब।


धरती ने ओढी हरियाली, फैली है ये छटा निराली।


बिजली की चम-चम, बूंदों कि छम-छम।


बादल के गर्जन से , डरता है मेरा मन।


कब नदी भरेगी, सागर तक जायेगी?


मेरे मन का जल, भरकर ले आएगी।


सागर से मिलना ही, नदी का लक्ष्य है।


सबको जल देना, नदी का लक्ष्य है।



Friday, May 22, 2009

क्या तुम डरते हो

क्या तुम डरते हो, काले घनघोर अंधेरे से, इस जग के फेरे से।
क्या तुम डरते हो, गरजते बादलों से, कड़कती बिजली से।
क्या तुम डरते हो, उफनती नदी से, बहती हवा से।
क्या तुम डरते हो , गिरते झरने से, घिरते तूफान से।
क्या तुम डरते हो, ऊंचे पहाड़ से, चलते हिंडोले से।
क्या तुम डरते हो, लम्बी सड़क से, तेज़ रफ्तार से।
क्या तुम डरते हो,खतरनाक मोड़ से, दुर्घटना से।
क्या तुम डरते हो, सपनों से, हकीकत से।
डर-डर के जीना कैसा जीना है।
डर को मन से निकाल कर जीन ही जीना है।

Wednesday, May 13, 2009

इंतजार

इंतजार रहता है, हर किसी को किसी का।
भोजन का हो चाहे भजन का ।
आने का हो चाहे जाने का।
मिलने का हो चाहे बिछड़ने का।
सब इसी उदेड-बुन मै लगे है।
कब ख़त्म हो यह सिलसिला इंतजार का।
जन्म और मृत्यु का भी इंतजार होता है।
शादी और बर्बादी का भी होता है इंतजार।
परीक्षा की डेट का करते हैं इंतजार।
फ़िर करने लगते हैं इंतजार रिजल्ट का।
कब ख़त्म हो यह सिलसिला इंतजार का।
छुट्टी का इंतजार बेसब्री से होता।
फ़िर होता कालेज खुलने का इंतजार।
पार्टी का इंतजार हर समय है रहता।
उसके बाद आता उत्सव का इंतजार।
कब ख़त्म हो यह सिलसिला इंतजार का।
बस आने का इंतजार, टिकट मिलने का इंतजार।
बस मै बैठे तो स्टाप आने का इंतजार।
क्लास मै टीचर के आने का इंतजार।
टीचर का बोरिंग लेक्चर ख़त्म होने का इंतजार।
कब ख़त्म हो यह सिलसिला इंतजार का।
लिस्ट बहुत लम्बी है, इंतजारों की ।
कभी न ख़त्म होगा सिलसिला इंतजार का.

भीगा मन


आज पहली बार भीगा मन,
इससे पहले बस तन भीगा था।
चन्द फुहारों के छींटों से,
बादल की गिरती बूंदों से।
सर्द हवाएं बेकल करतीं,
गिरती बूंदों को बिखरातीं।
न जाने क्यूँ तन पर पड़ती,
मन को कभी नहीं छू पाई।
आज मगर वो बारिश आई,
एक अनोखा संदेश लाई
तन भीगा, मन भीग गया है,
कोई इसको जान न पाया।
मैंने क्या खोया क्या पाया?

Thursday, March 12, 2009

फागुन आया

प्रकृति का यौवन उमड़ा है,
खिल रही हर कोमल कली।

धरा, धरा ने वेश निराला,
इठलाती है हर डाली।

बाट रहा ऋतुराज बहार
लगा रही कोयल गुहार।

देखो आम भी बौर गया,
खिल गए टेसू, कचनार।

फूलों के ये रंग-बिरंगे,
गुच्छ बना रहे मदहोश।

होली का त्यौहार आ रहा,
भरता एक अनोखा जोश।

कुछ दोहे, कुछ छंद उडे,
प्रेम भरे मन मै बहुरंग।

लाल गुलाबी चेहरे हो गये,
दादी खड़ी रह गई दंग।

माती की भीनी खुशबु ने,
याद दिलाया भाईचारा।

इंतजार किस बार का यारो,
आया पर्व है प्यारा।

आओ तुम भी रंग लगालो,
फ़िरमत कहना मिले नहीं ।

फागुन सबको गले लगता ,
उंचनीच का भेद नहीं.

होली की शुभकामनाओं के साथ.

Tuesday, March 10, 2009

होली मुबारक

होली का त्यौहार रंगीला, आया लेकर रंग।
चुन्नू भीगा, मुन्नू भीगा मै भी भीगी संग।
गट्टू छुपा बैठा था नीचे, सब फ़िर भागे उसके पीछे
आज नही वो बच पायेगा, सब रंगों मै रंग जाएगा।
मम्मी गुझिया बाँट रही है, दीदी टीका लगा रही है।
गोलू ने पीछे से आकर, गट्टू को भी पोत दिया है।
आओ तुम टीका लगवालो, एक और गुझिया भी खा लो।
फ़िर मुझसे मत करना शिकायत, हम न कोई बात सुनेंगे।
जीते रहे अगर हम, अगली बार होली मै मिलेंगे।
होली मुबारक